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Monday, May 18, 2026

सुष्मिता सेन: जब ‘मैं हूँ ना’ के सेट पर पहनी थी वो आइकॉनिक लाल साड़ी

फिल्म ‘मैं हूँ ना’ (2004) में सुष्मिता सेन का प्रोफेसर चांदनी का किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। उनका वो लाल साड़ी वाला लुक तो फैशन आइकॉन बन गया था! हाल ही में, सुष्मिता सेन ने उस यादगार शूटिंग के दिन को याद किया, जब उन्होंने डायरेक्टर फराह खान और को-स्टार शाहरुख खान के साथ मिलकर इस सीन को शूट किया था। यह लम्हा उनके करियर के सबसे हसीन पलों में से एक है, और उन्होंने सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कुछ मज़ेदार किस्से साझा किए, जो फैंस को पुरानी यादों में ले गए।

‘मैं हूँ ना’ में सुष्मिता ने जो साड़ियाँ पहनी थीं, वे उनकी ख़ूबसूरती और किरदार की ग्रेस को चार चांद लगाती थीं। लेकिन, फिल्म के एक बेहद ज़रूरी सीक्वेंस में पहनी गई लाल रंग की शिफॉन साड़ी का जादू ही कुछ और था। सुष्मिता ने बताया कि उन्हें वह साड़ी पहनना बहुत पसंद आया था। इस साड़ी में सुष्मिता का स्टाइल, उनकी चाल और उनका अंदाज़ इतना रोमांटिक और क्लासी था कि वह लुक तुरंत हिट हो गया। आज भी यह साड़ी बॉलीवुड के सबसे यादगार कॉस्ट्यूम्स में से एक मानी जाती है।

इस फ़िल्म की शूटिंग का माहौल हमेशा से ही ख़ुशनुमा रहा है। सुष्मिता ने बताया कि इस लाल साड़ी वाले सीन को शूट करते समय भी सेट पर गजब की ऊर्जा थी।

यह फ़िल्म फराह खान के निर्देशन में बनी पहली फ़िल्म थी। सुष्मिता ने याद किया कि फराह को प्रोफेसर चांदनी के लुक को लेकर स्पष्ट विज़न था—उन्हें पारंपरिक भारतीय साड़ी को मॉडर्न और स्टाइलिश टच देना था। सुष्मिता ने फराह के परफेक्शन और डेडिकेशन की तारीफ़ की, जिसकी वजह से यह किरदार इतना सफल हो पाया।

सुष्मिता और शाहरुख की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री शानदार थी। वे दोनों असल जीवन में भी अच्छे दोस्त हैं, और यह दोस्ती उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री में झलकती थी। लाल साड़ी वाला सीन हो या कोई और, शाहरुख खान के साथ सेट पर रहना हमेशा मज़ेदार होता था। सुष्मिता ने बताया कि शूटिंग के दौरान उनका सहयोग और मज़ाकिया स्वभाव लंबे दिनों की शूटिंग को भी हल्का बना देता था।

सुष्मिता सेन ने अपने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि ‘मैं हूँ ना’ सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि एक ख़ूबसूरत सफ़र था। यह लाल साड़ी वाला दिन उस सफ़र का एक हल्का-फुल्का और यादगार पड़ाव था। उनके लिए, फराह और शाहरुख के साथ काम करना हमेशा एक सीखने और मस्ती करने वाला अनुभव रहा है।

फ़ैंस आज भी इस फ़िल्म के गाने और सीन को देखते हैं, और सुष्मिता की यह लाल साड़ी वाली यादें बताती हैं कि पर्दे पर जो जादू दिखा, वह सेट पर मौजूद कलाकारों के प्यार और तालमेल का नतीजा था। यह दिन सुष्मिता के लिए सिर्फ़ एक शूटिंग का दिन नहीं, बल्कि एक ऐसी कीमती याद बन गया है, जिसे वह आज भी मुस्कुराहट के साथ याद करती हैं।

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