बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं जो कभी पर्दे तक नहीं पहुँच पातीं। हाल ही में मशहूर अभिनेता राजीव खंडेलवाल ने एक इंटरव्यू के दौरान इंडस्ट्री के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली के साथ अपने पुराने और अनकहे अनुभव को साझा किया। राजीव ने खुलासा किया कि कैसे एक बड़े प्रोजेक्ट के चक्कर में उनका कीमती एक साल बर्बाद हो गया और उन्हें बिना किसी स्पष्ट जानकारी के ‘अंधेरे’ में रखा गया।
दो फिल्मों की डील और ‘चेनाब गांधी’ का सपना
राजीव खंडेलवाल, जिन्हें उनकी सादगी और गंभीर अभिनय के लिए जाना जाता है, ने बताया कि साल 2009-2010 के आसपास उन्हें संजय लीला भंसाली ने एक नहीं बल्कि दो फिल्मों की डील के लिए साइन किया था। इसमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था ‘चेनाब गांधी’।
यह फिल्म उस समय काफी चर्चा में थी क्योंकि इसमें राजीव के साथ महानायक अमिताभ बच्चन और विद्या बालन जैसे दिग्गज कलाकार नजर आने वाले थे। फिल्म का निर्देशन विभु पुरी करने वाले थे। राजीव इतने उत्साहित थे कि उन्होंने विद्या बालन के साथ फिल्म के पोस्टर के लिए बाकायदा फोटो शूट भी किया था।
कॉन्ट्रैक्ट की जंजीरें और ‘वक्त की बर्बादी’
इंटरव्यू में अपना दर्द साझा करते हुए राजीव ने कहा, “मुझे एक फिल्म के लिए साइन किया गया और लगभग 9 महीने से एक साल तक मुझे रोके रखा गया। चूंकि मैं कॉन्ट्रैक्ट से बंधा था, इसलिए मैं उस दौरान कोई और काम नहीं कर सकता था।”
अभिनेता ने आगे बताया कि सबसे दुखद बात यह थी कि उन्हें फिल्म की प्रगति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘घोस्ट’ (संपर्क तोड़ लेना) कर दिया गया था। काफी समय बीत जाने के बाद जब फिल्म नहीं बनी, तब उन्हें अहसास हुआ कि उनका एक साल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।
भंसाली से नहीं मिली कोई सफाई
जब राजीव से पूछा गया कि क्या भंसाली ने उन्हें फिल्म बंद होने का कारण बताया, तो उन्होंने कहा, “मैंने जवाब मांगा था, लेकिन मुझे कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। हालांकि, मैं इसे व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेता। शायद फंडिंग की समस्या रही होगी या कोई और वजह, लेकिन एक कलाकार के तौर पर वह समय मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।”
“मुझे बुरा इस बात का नहीं लगा कि फिल्म नहीं बनी, बल्कि इस बात का लगा कि मुझे अंधेरे में रखा गया। जब मुझे आखिरकार पता चला कि फिल्म नहीं बन रही, तो मैंने तुरंत आगे बढ़ने का फैसला किया और ‘सच का सामना’ शो साइन किया।” — राजीव खंडेलवाल
‘चेनाब गांधी’ जैसी फिल्में अगर पर्दे पर आतीं, तो शायद राजीव खंडेलवाल का फिल्मी सफर आज कुछ और होता। हालांकि, अभिनेता ने बिना किसी कड़वाहट के इस अनुभव को ‘इंडस्ट्री का हिस्सा’ मानकर स्वीकार कर लिया है। आज भी प्रशंसक उस अधूरी फिल्म की कहानी और कास्टिंग को लेकर चर्चा करते रहते हैं।
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