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Friday, June 12, 2026

मैडॉक फिल्म्स में दरार? निर्देशक ने लगाया काम रोकने और ‘इग्नोर’ करने का आरोप

बॉलीवुड की मशहूर प्रोडक्शन कंपनी मैडॉक फिल्म्स इन दिनों अपनी ‘हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स’ के लिए चर्चा में है, लेकिन पर्दे के पीछे की एक कहानी अब विवाद का रूप ले रही है। नवजोत गुलाटी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दिनेश विजन ने उनकी फिल्म को तीन साल से ठंडे बस्ते में डाल रखा है, और इसकी वजह अमर कौशिक का बर्ताव है।

विवाद की मुख्य बातें
निर्देशक का आरोप है कि उनकी फिल्म की तैयारी पूरी थी, लेकिन अचानक सब कुछ रुक गया। उनके दावों के अनुसार: अमर कौशिक की चुप्पी: निर्देशक का कहना है कि फिल्म के क्रिएटिव फैसलों में शामिल अमर कौशिक ने अचानक उनके फोन उठाना बंद कर दिए। मैसेज का जवाब न मिलने के कारण फिल्म का काम आगे नहीं बढ़ पाया।

तीन साल का इंतजार: किसी भी फिल्म मेकर के लिए तीन साल का समय बहुत कीमती होता है। निर्देशक का आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के उन्हें अधर में लटका कर रखा गया।

दिनेश विजन पर निशाना: निर्देशक के मुताबिक, दिनेश विजन ने भी इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और अमर कौशिक की ‘खामोशी’ की वजह से प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया।

क्या यह ‘पावर गेम’ है?
फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े सफल निर्देशक और निर्माता छोटे प्रोजेक्ट्स या नए निर्देशकों को नजरअंदाज करने लगते हैं। इस मामले में भी यही आरोप लग रहे हैं कि क्या मैडॉक फिल्म्स के अंदर केवल उन्हीं फिल्मों को तवज्जो दी जा रही है जो उनकी ‘यूनिवर्स’ का हिस्सा हैं?
“फिल्म को रिजेक्ट करना एक बात है, लेकिन उसे बिना बताए सालों तक लटकाए रखना किसी के करियर के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।”

फिल्म जगत में किसी भी निर्देशक के लिए तीन साल का समय बहुत बड़ा होता है। इस दौरान वह कई अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकता था, लेकिन ‘मैडॉक’ जैसे बड़े बैनर के साथ जुड़े होने के कारण वह कहीं और नहीं जा सका। निर्देशक का दर्द यह है कि उन्हें न तो काम शुरू करने की अनुमति दी गई और न ही साफ तौर पर मना किया गया। इस “हंग स्टेट” (अधर में लटके रहने) की वजह से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ, बल्कि उनके करियर की रफ्तार भी थम गई।
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या मेकर्स को प्रोजेक्ट्स के प्रति और अधिक पारदर्शी (Transparent) होना चाहिए। अगर कोई फिल्म नहीं बनानी है, तो उसे समय रहते रद्द कर देना चाहिए ताकि निर्देशक कहीं और अपनी किस्मत आजमा सके। किसी को तीन साल तक ‘घोस्ट’ (संपर्क तोड़ लेना) करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह एक फिल्म निर्माता की साख पर भी दाग लगाता है।

फिलहाल दिनेश विजन या अमर कौशिक की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन इस खुलासे ने बॉलीवुड के वर्क कल्चर और बड़े बैनर्स के काम करने के तरीके पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अगर यह विवाद बढ़ता है, तो मैडॉक फिल्म्स की ब्रांड इमेज पर इसका असर पड़ सकता है।

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