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Saturday, May 16, 2026

महाशिवरात्रि पर बड़ा धमाका: संजय लीला भंसाली और केतन मेहता ला रहे हैं ऐतिहासिक महागाथा ‘जय सोमनाथ’

हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने एक बार फिर अपनी भव्य कल्पना और ऐतिहासिक कहानियों के प्रति अपने जुनून से प्रशंसकों को चौंका दिया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, भंसाली ने अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘जय सोमनाथ’ का आधिकारिक ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए भंसाली ने दिग्गज निर्देशक केतन मेहता के साथ हाथ मिलाया है।

आस्था और साहस की अनसुनी कहानी
‘जय सोमनाथ’ भारतीय सभ्यता के एक बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण अध्याय को बड़े पर्दे पर जीवंत करेगी। यह फिल्म 1025-1026 ईस्वी के उस दौर की कहानी कहेगी जब महमूद गजनवी ने गुजरात के पवित्र सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया और उसे लूटा था। फिल्म का मुख्य संदेश विनाश पर सृजन की जीत और अटूट आस्था है।

घोषणा के साथ जारी किए गए टीज़र में एक शक्तिशाली टैगलाइन दी गई है: “मंदिर तोड़ा जा सकता है, लेकिन आस्था नहीं।”

दो दिग्गजों का अनूठा मिलन
जहाँ संजय लीला भंसाली अपनी भव्यता और ‘लार्जर दैन लाइफ’ सिनेमा के लिए जाने जाते हैं, वहीं केतन मेहता अपनी गहरी और यथार्थवादी ऐतिहासिक कहानियों (जैसे ‘मिर्च मसाला’ और ‘मंगल पांडे’) के लिए मशहूर हैं। यह पहली बार है जब ये दोनों गुजराती मूल के फिल्ममेकर एक साथ आ रहे हैं।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सिनेमाई विजन
यह फिल्म केवल एक ऐतिहासिक घटना मात्र नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता के गौरव की कहानी होने वाली है। फिल्म के एक करीबी सूत्र ने बताया कि पटकथा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि कैसे सोमनाथ मंदिर को बार-बार तोड़े जाने के बावजूद, भारतीय समाज ने हर बार अपनी आस्था के दम पर इसका पुनर्निर्माण किया। यह फिल्म उन योद्धाओं और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी। भंसाली और मेहता का लक्ष्य एक ऐसी फिल्म बनाना है जो आने वाली पीढ़ियों को भारत के गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास से परिचित कराए।

भव्यता और तकनीक का बेजोड़ संगम
संजय लीला भंसाली की फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान उनकी ‘विजुअल ग्रैंड्योर’ यानी दृश्यात्मक भव्यता होती है। सूत्रों के मुताबिक, ‘जय सोमनाथ’ के लिए 11वीं शताब्दी के गुजरात और प्रभास पाटन को पुनर्जीवित करने के लिए मुंबई में एक विशाल सेट का निर्माण किया जा रहा है। फिल्म में आधुनिक VFX और CGI तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा ताकि उस दौर के युद्ध दृश्यों और सोमनाथ मंदिर की अद्वितीय वास्तुकला को हूबहू पर्दे पर उतारा जा सके। केतन मेहता, जिन्होंने भारत में एनीमेशन और विजुअल इफेक्ट्स की नींव रखने में मदद की है, व्यक्तिगत रूप से फिल्म के तकनीकी पक्ष की निगरानी कर रहे हैं।

कब होगी रिलीज?
निर्माताओं ने पुष्टि की है कि फिल्म पर काम शुरू हो चुका है और यह 2027 में दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देगी। हालांकि फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन चर्चा है कि भंसाली इसके लिए बॉलीवुड के बड़े ए-लिस्टर्स को साइन कर सकते हैं।

क्यों खास है यह फिल्म?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारतीय पुनरुत्थान का प्रतीक है। आज तक मुख्यधारा के सिनेमा में इस विषय पर इतनी बड़ी फिल्म नहीं बनी है। भंसाली और मेहता की जोड़ी से उम्मीद की जा रही है कि वे न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के साथ न्याय करेंगे, बल्कि दर्शकों को एक विजुअल ट्रीट भी देंगे।

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