बड़े घर की छोटी बहू के शनिवार के एपिसोड में अहाना दुर्गा से हॉस्पिटल में कहती है कि वह सभी बहुओं के साथ शोटू दा के साथ एक कराकर रहेगी। अहाना ने कहा कि आपको पूरा यकीन है कि शोटू दा आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे वैसे ही आप दोनों हमेशा साथ रहेंगे।
दूसरी ओर दुर्गा घर आकर कहती है कि शोटू दा अब से उनके घर रहेंगे। ठाकुर और दुर्गा की देवरानी कह देती है कि ऐसा नहीं होगा। वह कह देती है कि अपनी उम्र का लिहाज करो की इस उम्र में आप किसी पराए पुरुष को घर पर रखोगे?
उधर अहाना शोटू दा को लेकर आती है। ठाकुर शोटू दा की बेइज़्ज़ती करती है। पोलटू उसे समझाता है कि वह इतनी नफरत न करे। अर्जुन कहता है कि अगले हफ्ते पोलटू और पारो की शादी है।
ठाकुर कहती है कि मेरे ही बेटे की शादी है और मुझे ही कुछ पता नहीं। पोलटू ने कहा आप समझ ही गयी होंगी की ऐसा क्यों? क्योंकि आपने हमेशा रिश्ते तोड़ने का काम किया है जोड़ने का नहीं।
पोलटू और पारो की शादी का दिन आ जाता है और वह दोनों रजिस्टर मैरिज कर लेते हैं। इसके बाद वह एक दूसरे को वरमाला पहनाते हैं और पोलटू उसकी मांग भरता है। वहीं, अहाना और सभी बहुएं विटनेस के तौर पर साइन करते हैं।
उधर, अहाना वकील से एक और एप्लीकेशन निकालने को कहती है और दुर्गा और शोटू दा का नाम लेती है। दुर्गा अहाना से सभी के सामने अपने शब्द वापस लेने को कहती है। अहाना उससे पूछती है क्या वह उनके साथ नहीं रहना चाहती? दुर्गा कहती है समाज क्या कहेगा? लोग तरह तरह की बात करेंगे।
ठाकुर कहती है कि अगर यह घर पर रहेंगे तो वह एक दिन नहीं रहेगा। दुर्गा की देवरानी भी कहती है कि वह भी इस घर से चली जायेगी। पोलटू कहता है कि माँ आपको जाना है तो आप जा सकते हो मैं आपका इंतज़ाम कर दूंगा लेकिन बड़ी मामी ने हमारे लिए बहुत कुछ किया है।
पोलटू अर्जुन से सही फैसला लेने को कहता है। उसी समय आहना का बॉस वहां आता है और दुर्गा को उसकी ट्रॉफी देता है। इसके साथ ही उसे २० हजार मूर्तियों का ऑर्डर देता है। वहीं, वह पारो को शादी का गिफ्ट देता है।
अर्जुन उससे पूछता है उसने दुर्गा के लिए गिफ्ट नहीं लाया? वह कहता है उसकी माँ एक नया सफर शुरू करने वाली है। वह दुर्गा से माफी मांगता है कि उसने कभी उसकी खुशी और अकेलेपन का ख्याल नहीं रखा।
इसी समय दुर्गा की देवरानी का हृदयपरिवर्तन होता है और वह दुर्गा के पास आकर कहती है कि वह यह घर छोड़कर नहीं जाएगी। उसको जाते देखकर ठाकुर जी का भी हृदयपरिवर्तन हो जाता है और वह कहती है कि वह गलत थी और उसकी बहुएं सही।
अहाना दुर्गा और शोटू दा की शादी करवाती है। दोनों रजिस्टर मैरिज करके एक दूसरे को वरमाला पहनाते हैं। दुर्गा अहाना से कहती है कि वह कैसे उसका शुक्रगुजार करे लेकिन वह एक चीज़ ज़रूर करना चाहती है। दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ अहाना की जय जयघोष करती है।
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