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Wednesday, June 10, 2026

वीरता को सलाम: राजनाथ सिंह ने शहीद अरुण खेत्रपाल के परिवार को किया सम्मानित

हाल ही में भारतीय सेना के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता, शहीद कैप्टन अरुण खेत्रपाल की वीरता पर आधारित फिल्म ‘इक्कीस’ की एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस भावुक कर देने वाले अवसर पर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि रक्षा मंत्री ने स्वयं शहीद अरुण खेत्रपाल के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया।

1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान ‘बैटल ऑफ बसंतर’ में अरुण खेत्रपाल ने जो अदम्य साहस दिखाया था, उसे आज भी भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में गिना जाता है। मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्होंने दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त कर दिया था और देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

इस स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान माहौल काफी गर्व और भावनाओं से भरा रहा। यहाँ ड्राफ्ट के कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं। राजनाथ सिंह ने शहीद के भाई, मुकेश खेत्रपाल और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मंच पर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि देश कैप्टन अरुण खेत्रपाल जैसे वीरों का हमेशा ऋणी रहेगा।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘इक्कीस’ जैसी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह बताने का माध्यम हैं कि हमारी आजादी और सुरक्षा की कीमत क्या है। उन्होंने फिल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन और मुख्य अभिनेता जो अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभा रहे हैं, की भी तारीफ की, जिन्होंने इस कहानी को पर्दे पर जीवंत किया।

राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया और कार्यक्रम के दौरान यह साझा किया कि अरुण खेत्रपाल की कहानी वीरता की पराकाष्ठा है। उन्होंने बताया कि कैसे एक युवा अधिकारी ने अंतिम सांस तक पीछे हटने से इनकार कर दिया था। उनका वह प्रसिद्ध संदेश— “मेरी गन काम कर रही है और मैं लड़ना जारी रखूँगा”—आज भी हर भारतीय सैनिक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

फिल्म ‘इक्कीस’ कैप्टन अरुण खेत्रपाल के जीवन और उनके युद्ध कौशल को दर्शाती है। स्क्रीनिंग के दौरान उपस्थित अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने माना कि यह फिल्म शहीद खेत्रपाल के बलिदान को एक सच्ची श्रद्धांजलि है। इस तरह के आयोजनों से न केवल शहीद परिवारों को सम्मान मिलता है, बल्कि समाज में सेना के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना भी गहरी होती है।

यह शाम केवल एक फिल्म की स्क्रीनिंग नहीं थी, बल्कि यह भारत के उस ‘इक्कीस’ साल के जांबाज को याद करने का दिन था जिसने इतिहास बदल दिया। राजनाथ सिंह द्वारा उनके परिवार को किया गया यह सम्मान भारतीय सेना की परंपराओं और वीरता के प्रति सरकार की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

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