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Monday, May 18, 2026

सैयामी खेर का नया खुलासा: “लोग समझते हैं मैं 24 घंटे स्पोर्ट्स मोड में हूँ”

सैयामी खेर भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने अपनी शारीरिक क्षमताओं को केवल जिम की चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा है। उनका यह बयान कि “लोग मुझे हमेशा स्पोर्ट्स मोड में समझते हैं”, उनकी उस कड़ी मेहनत का नतीजा है जो उन्होंने मैदान पर बिताई है। अक्सर देखा जाता है कि एक्टर्स किसी भूमिका के लिए कुछ महीनों की ट्रेनिंग लेते हैं, लेकिन सैयामी के मामले में यह उल्टा है।

उनके लिए खेल पहले आए और अभिनय बाद में। यही कारण है कि जब वे ‘घूमर’ जैसी फिल्म में एक खिलाड़ी का किरदार निभाती हैं, तो उनके शरीर की भाषा (body language) में वह प्रामाणिकता नजर आती है जो एक गैर-खिलाड़ी के लिए लाना असंभव है। उनका मानना है कि खेल उन्हें जमीन से जुड़े रहने में मदद करते हैं, चाहे वे सफलता के शिखर पर हों या संघर्ष के दौर में।

मैराथन: सैयामी की मानसिक मजबूती का राज
दौड़ने या मैराथन में भाग लेने को सैयामी केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं मानतीं। उनके अनुसार, मैराथन दौड़ना एक आध्यात्मिक अनुभव की तरह है। जब वे कहती हैं कि लोग उन्हें “परमानेंट स्पोर्ट्स मोड” में देखते हैं, तो इसका एक पहलू उनकी मानसिक दृढ़ता भी है।

एक फिल्म की शूटिंग के थकाऊ घंटों के बाद भी सुबह 4 बजे उठकर 20 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना उनके अनुशासन को दर्शाता है। सैयामी ने कई इंटरव्यू में साझा किया है कि फिल्म इंडस्ट्री की अनिश्चितताओं और ‘रिजेक्शन’ से निपटने के लिए दौड़ना उनका सबसे बड़ा सहारा रहा है। जब वे सड़क पर दौड़ती हैं, तो वे केवल एक सेलिब्रिटी नहीं होतीं, बल्कि एक ऐसी धावक होती हैं जो अपनी सीमाओं को लांघने की कोशिश कर रही है।

स्टीरियोटाइप तोड़ती एक आधुनिक अभिनेत्री
सैयामी का यह बयान एक गहरी सच्चाई की ओर भी इशारा करता है—कैसे समाज अक्सर महिलाओं को एक निश्चित खांचे में फिट कर देता है। यदि कोई अभिनेत्री फिट है और खेलों में रुचि रखती है, तो अक्सर लोग उसकी कलाकारी से ज्यादा उसकी फिटनेस की चर्चा करने लगते हैं।

सैयामी इस ‘स्पोर्ट्स मोड’ वाली इमेज का आनंद तो लेती हैं, लेकिन वे साथ ही यह भी स्पष्ट करती हैं कि वे एक भावुक कलाकार हैं। वे इस रूढ़िवादिता को तोड़ रही हैं कि एक ‘स्पोर्ट्स पर्सन’ संवेदनशील अभिनय नहीं कर सकता या एक ‘ग्लैमरस एक्ट्रेस’ पसीने से लथपथ होकर मीलों नहीं दौड़ सकती। उनकी यात्रा उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो अपने करियर और अपने जुनून के बीच चुनाव नहीं करना चाहतीं, बल्कि दोनों में उत्कृष्टता हासिल करना चाहती हैं।

भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
आने वाले समय में सैयामी से उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी इस एथलेटिक इमेज का उपयोग और भी प्रभावशाली कहानियों को पर्दे पर लाने के लिए करेंगी। उनकी हालिया ‘आयरनमैन’ की उपलब्धि ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है, जिससे यह साबित होता है कि उनका “स्पोर्ट्स मोड” केवल एक बयान नहीं बल्कि उनकी जीवनशैली का आधार है।

फिल्म निर्माता अब उन्हें ऐसे किरदारों के लिए पहली पसंद मानते हैं जिनमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की मजबूती की आवश्यकता होती है। सैयामी की यह यात्रा दिखाती है कि एक कलाकार के रूप में आपकी असल जिंदगी के अनुभव आपकी स्क्रीन पर दी जाने वाली परफॉरमेंस को कितना समृद्ध बना सकते हैं।

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