मन सुंदर में ६ महीने की आगे की कहानी से मंगलवार के एपिसोड की शुरुआत हुई। एक महिला खाटूश्यामजी की आरती करती नज़र आई और वह कोई और नहीं बल्कि शीतल है। वह दादी को आकर आरती दी तब उन्होंने कहा कि पहले बिट्टू को आरती दो।
उसी समय जूही समर और उसकी बच्ची के साथ नीचे आयी जो लगातार रोये जा रही थी। उसकी नज़र हटाने के लिए सोनी नज़र का सामान लेकर आई। जैसे ही वह नज़र उतारने लगी दादी ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा कि लड़कियों को नज़र नहीं लगती वह ऐसे ही नज़र बट्टू होतीं हैं।
दादी ने सोनी से कहा पहले बिट्टू की नज़र उतार दो फिर इस लड़की की उतार देना। जूही गुस्से से कहने लगी कि आखिर क्यों वह हमेशा उसकी मुन्नी और बिट्टू में भेदभाव करती है? बल्कि वह इस घर का है भी नहीं। समर उसे शांत करके वहां से ले गया।
दादी ने सोनी से कहा कि उसकी बहु की जुबान पर लगाम रखो। सोनी ने कहा कि बिट्टू इस घर का वारिस कैसे बन सकता है वह नाहर की नाजायज औलाद है? लेकिन दादी उसकी बात नहीं सुनी।
शीतल गयी रोमिल और अग्नि को आरती देने और उसके बाद उसने अग्नि से कहा कि आपको पता है आपकी माँ क्या क्या कर रही है आपके लिए? अग्नि ने उसे चुप रहने को कहा और उसकी भाभी न बनने की कोशिश करें इसकी हिदायत दी और चली गयी।
शीतल ने रोमिल से कहा कि उसके पैर में खुजली हो रही है तो वह खुजा दे। रोमिल ने इनकार कर दिया फिर उसने कहा कीजिये। इसके बाद उसने कहा उसके हाथ दुख रहे हैं तो वह दबा दे उसने कहा कि ऐसे ही वह उससे गुलामी करवाएगी। उसने कहा अग्नि को पता नहीं कि मैं उसकी भाभी नहीं बल्कि सौतन हूँ।
कुछ ऑफिस के लोग घर आये और नाहर के पिता से मिले। उन्होंने कहा यह काम नाहर का है उससे बात करो। उन लोगों ने कहा कि नाहर ने जवाब नहीं दिया। उसके पिता ने नाहर को बुलाया।
नाहर अंधेरे में अपने कमरे में अकेला बैठा था और उसे रूही की सभी बातें याद आ रही थी। वह जब बाहर आया तो शीतल ने उसे आरती दी लेकिन उसने मना कर दिया।
जब नाहर नीचे आया तो उसके पिता ने उसे खूब डांट लगाई और दादी ने उससे कहा कि उनका कारोबार वीर प्रताप उसके लड़के और दादा के नाम पर है। दादी ने कहा उसके दादा का नाम डूबने से बचा ले।
नाहर जब ऑफिस पहुंचा तो उसे कोई भी डिज़ाइन पसंद नहीं आये। समर ने कहा वह देख लेगा। जब नाहर ने प्रेजेंटेशन में एक पेंटिंग देखी तो वह दो प्रेमियों के बिछड़ने की कहानी लगी जो उसे रूही की याद दिलाई।
इसी समय रूही की ज़िंदगी की झलक दिखाई गई जिसने वही पेंटिंग की है तो नाहर को पसंद आई। वहां एक लड़का आकर रूही का शुक्रियादा करता है। रूही कहती है शुक्रियादा तो उसे उसका करना चहिए स्पर्श क्योंकि तुम्हारी वजह से मुझे इस आर्ट गैलरी में अपने आगे की मंजिल मिल गयी।
नाहर तय करता है कि अब उसके ऑफिस का इंटीरियर यही आर्टिस्ट करेगा जिसकी कला में गहराई है।
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