हाल ही में आयोजित एक एक्टर्स राउंडटेबल में फिल्म इंडस्ट्री के उभरते और स्थापित सितारों—ध्रुव, ईशान, कृति और विक्की—ने एक ऐसे मुद्दे पर खुलकर बात की, जो आजकल बॉलीवुड में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह मुद्दा है ‘एंटोरेज कॉस्ट’ यानी किसी कलाकार के साथ रहने वाले उनके निजी स्टाफ का खर्च।
चर्चा की शुरुआत करते हुए विक्की ने बड़ी बेबाकी से कहा कि आज के समय में एक फिल्म का बजट जितना कलाकार की फीस पर निर्भर नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा उसके ‘एंटोरेज’ पर खर्च हो जाता है। उन्होंने समझाया कि पहले एक्टर्स एक या दो सहायकों के साथ आते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब हर एक्टर के साथ उनका अपना स्टाइलिस्ट, मेकअप आर्टिस्ट, हेयर ड्रेसर, सिक्योरिटी गार्ड्स और पर्सनल मैनेजर होते हैं।
ईशान ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह सिर्फ वेतन की बात नहीं है। इन सभी लोगों के आने-जाने का बिजनेस क्लास का टिकट, फाइव स्टार होटेल में रुकने का खर्च और उनके खाने-पीने का बिल भी फिल्म के प्रोड्यूसर को ही उठाना पड़ता है। ईशान का मानना था कि कई बार यह खर्च फिल्म के कुल प्रोडक्शन बजट के एक बड़े हिस्से को खा जाता है, जिससे फिल्म की क्वालिटी पर असर पड़ता है।
कृति ने इस मुद्दे पर एक संतुलित पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि एक एक्ट्रेस के तौर पर उन्हें अच्छी वैनिटी टीम और स्टाइलिस्ट की जरूरत होती है क्योंकि ‘लुक’ फिल्म का एक अहम हिस्सा होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि “जरूरत” और “लक्जरी” के बीच एक बारीक लकीर होनी चाहिए। कृति ने कहा, “अगर मैं अपनी टीम के 10 लोगों को लेकर चलती हूं और उनका सारा खर्च प्रोड्यूसर पर डालती हूं, तो यह गलत है। हमें समझना होगा कि प्रोड्यूसर का पैसा अंततः फिल्म के काम आना चाहिए।”
राउंडटेबल में ध्रुव ने एक बहुत ही व्यावहारिक मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़े स्टार्स की बड़ी फिल्मों में शायद यह खर्च छुप जाता है, लेकिन जब बात छोटी या मीडियम बजट की फिल्मों की आती है, तो यह ‘एंटोरेज कॉस्ट’ फिल्म की कमर तोड़ देती है। ध्रुव ने कहा, “कई बार तो ऐसा होता है कि एक्टर की फीस कम होती है, लेकिन उसकी टीम का खर्चा उसकी फीस से भी ज्यादा निकल जाता है। यह इंडस्ट्री के लिए एक खतरनाक ट्रेंड है।”
पूरी बातचीत का सार यह निकला कि चारों कलाकार इस बात पर सहमत थे कि अब समय आ गया है जब एक्टर्स को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने सुझाव दिए कि। अगर कोई कलाकार एक बड़ी टीम रखना चाहता है, तो उसका कुछ हिस्सा उसे खुद अपनी फीस से वहन करना चाहिए।
फिल्म बनाना एक बिजनेस है, और अगर प्रोड्यूसर घाटे में रहेगा, तो अच्छी फिल्में बनना बंद हो जाएंगी। सेट पर ताम-झाम कम करके काम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
यह चर्चा सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रही है क्योंकि दर्शकों को पहली बार इंडस्ट्री के भीतर के इस आर्थिक पक्ष के बारे में इतनी गहराई से जानने को मिला।
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