मन अतिसुंदर के गुरुवार के एपिसोड में प्रथम ने राध्या को लिविंग रूम में सोते हुए देखा और नज़रंदाज़ किया। वह जा रहा था कि उसने देखा राध्या को ठंड लग रही है। प्रथम कम्बल लेकर नीचे आया और उसे उड़ा दिया।
राध्या ने नींद में तुरन्त उसको गिरा दिया तो दोबारा से उसने उसे कम्बल उड़ा दिया। प्रथम ने उसका चेहरा देखकर कहा कि यह इतनी गलतियां करती है लेकिन शकल से तो एकदम भोली लगती है। क्या राध्या सच में भोली है या भोली बनने का नाटक करती है?
अगली सुबह राध्या उठकर देखती है कि उसने कम्बल ओढ़ रखा है। उसने सोचा वह रात को अपने साथ कम्बल तो लायी नहीं थी और इस घर में मम्मी की के अलावा सिर्फ प्रथम उसका ख्याल रखता है तो वह समझ गयी कि प्रथम ने ही उसे कम्बल उड़ाया होगा।
वह गाड़ी की ओर देखती है जिसमें ६ बजे हुए हैं। वह कहती है कि इस समय तो माँ पापा जी को निम्बू पानी देती है। प्रथम तैयार होकर पापा के लिए निम्बू पानी लेकर जाती है तो वह देखती है कि वहां पहले से ही निहारिका ने पापा जी को निम्बू पानी दे दिया है।
दरअस्ल, जब राध्या ने सोचा कि वह पापा जी के लिए निम्बू पानी लेकर जाएगी तो निहारिका ने उसकी बात सुन ली थी और उसने सबसे पहले ओमकार को जाकर वह निम्बू पानी दे दिया। राध्या ने ओमकार से पूछा वह खाने में क्या खाना पसंद करेंगे? ओमकार ने उसकी बात टाल दी और वहां से चला गया।
इसके बाद निहारिका ने माली को सूखे पत्ते जलाते हुए देखा। निहारिका ने सोचा यह सही समय है सबूत मिटाने का। निहारिका वही साड़ी जलाने के लिए लेकर आई जिसे उसने रजनी बनकर पहनी थी।
निहारिका ज्योति से टकरा गई जिसने उससे कहा कि उसने हालही में किसी को यह साड़ी पहनते हुए देखा था। ज्योति को बात याद ही आने वाली होती है कि उसे कोई चाय लाने के लिए बुला लेता है।
निहारिका सबसे छुपकर गार्डन में जाती है। राध्या उसे देखकर उसका पीछा करती है। निहारिका वह साड़ी जला रही होती है लेकिन राध्या कुछ देख नहीं पाती। निहारिका सोचती है कि अब वह प्रथम के पास जाकर उसका सहारा बनकर उसका दिल जीतेगी। राध्या जब कचरे के पास आती है तो उसे बस यह पता चल पाता है कि निहारिका ने कोई कपड़ा जलाया है।
९ बजे शकुंतला राध्या से कहती है कि १० बजे उसे इस घर से निकलना है तो वह अपना सामान बांध लें। राध्या अपने कमरे में जाकर पैकिंग करती है तो प्रथम कहता है कि इसे गजर से जाने की सजा मिलनी चाहिए पर उसे क्यों दुख महसूस हो रहा है?
राध्या प्रथम से कहती है कि वह घर से जा रही है। वह कहती है कि उसकी बेगुनाही साबित करने के लिए उसके पास कोई सबूत नहीं है लेकिन उसने कोई गलती नहीं की है।
राध्या रजनी के पास आकर कहती है कि उसने उसे माँ से भी बढ़कर प्यार दिया है और हमेशा साथ निभाया है। उसने कहा कि उसने सालगिरह के दिन उसे मना दिया था कमल पर बैठने के लिए। राध्या ने कहा कि घरवाले तो हमें घर से निकालना चाहते हैं लेकिन वह तो उसकी सेवा करना चाहती थी।
राध्या रजनी के सर पर पैर रखकर आशीर्वाद लेती है। उसी समय शकुंतला वहां आ जाती है और उसका हाथ पकड़कर ले जा रही होती है कि रजनी उसका हाथ पकड़ लेती है।
यह देखकर सभी हैरान रह जाते हैं तो रजनी का भाई कहता है कि डॉक्टर ने कहा था कि रजनी अपने आसपास का माहौल महसूस कर सकती है। शकुंतला फिर भी जिद्द करके राध्या को ले जा रही होती है कि प्रथम रजनी के आंखों से गिर रहा आंसू देख लेता है।
प्रथम फ़ौरन जाकर शकुंतला और राध्या के सामने खड़ा हो जाता है और शकुंतला से कहता है कि राध्या कही नहीं जाएगी। इसके लिए राध्या भोलेनाथ का धन्यवाद अदा करती है कि आखिर उन्होंने उसे घर से न जाने के लिए अपना चमत्कार दिखा ही दिया।
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