मन अतिसुंदर के मंगलवार के एपिसोड में रजनी की सांसें तेज़ होती हैं और डॉक्टर व नर्स उनका इलाज करने में लग जाते हैं। वहां बाहर शकुंतला बाबा भोलेनाथ के सामने रोकर प्रार्थना करती है कि वह उसकी बहू को बचा लें जिन्होंने उसके घर को घर बनाया और उसे दो पोते भी दिये।
राध्या वहां आकर शकुंतला से कहती है कि वह फिक्र न करे क्योंकि रजनी जल्द से जल्द ठीक हो जाएगी। राध्या भोलेनाथ से प्रार्थना करती है कि उसने कभी दादी को रोते हुए नहीं देखा है तो वह उनकी प्रार्थना को स्वीकार कर दें।
वहीं, दूसरी ओर वहां निहारिका घर पर सबूत मिटा देती है ताकि कोई उसे न पकड़ ले। वह सोचती है अगर वह कोई बड़ा चीज़ करे तो वह सभी का ध्यान अपनी ओर खींचकर और उसका क्रेडिट पा सकती है।
राध्या सभी को हॉस्पिटल में पानी देती है और सभी की हालत देखकर बहुत दुखी होती है। तभी वहां निहारिका आती है और कहती है कि उसने अभी मंदिर में महामृत्युंजय का पाठ करवाया है रजनी की तबियत के लिए।
उसने कहा पंडित जी ने कहा है कि यह प्रसाद सभी घरवालों को दिया जाए और रजनी के हाथ में रक्षासूत्र बांधा जाए। नर्स निहारिका को अंदर जाकर वह बांधने से मना कर देती है तो निहारिका मन ही मन कहती है कि यह नर्स की वजह से उसका प्लान चौपट हो गया।
दूसरी ओर डॉक्टर बाहर आकर उसने बताया कि उन्होंने रजनी को बचा लिया है पर वह कोमा में चली गयी हैं। डॉक्टर ने कहा उन्हें कभी भी होश आ सकता है या फिर कभी नहीं आ सकता।
यह सुनकर घरवाले बहुत दुखी हो गए और प्रथम ने राध्या से पूछा कि क्या उसने रजनी को कमल पर बैठने से रोका था या नहीं? राध्या ने कहा हां। निहारिका ने अपने मन में कहा कि यह भोली राध्या को पता ही नहीं कि वह रजनी नहीं बल्कि मैं थी।
वहीं, एकता ने कहा कि मैं उस पल रजनी के साथ थी और वहां राध्य आयी ही नहीं थी। राध्या ने कहा जब हमने उन्हें मना किया था तब रजनी ने ठीक है करके जवाब भी दिया था। वहीं, ओमकार ने कहा कि जब एकता ने कमल का स्विच ऑन ही नहीं किया तब राध्या ने उसे बंद कैसे किया? शकुंतला ने कहा हम बताते हैं कि अब यह पकड़ी गई है तो खुद को बचाने के लिए झूठ कह रही है और भोली बन रही है।
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