मन अतिसुंदर के गुरुवार के एपिसोड में राध्या अपने कमरे में जाकर अपनी और प्रथम की शादी की फ़ोटो पर से निहारिका की फ़ोटो निकालती है। उसी समय निहारिका वहां आकर राध्या से पूछती है कि वह यहां क्या कर रही है? राध्या कहती है कि यह सवाल तो उसे पूछना चाहिए क्योंकि वह इस घर की बहू है और यह कमरा उसका है।
निहारिका को बहुत गुस्सा आता है और वह उसे जाने को कहती है। राध्या जाकर अलमारी से उसे उसके कपड़े निकाल देती है और उसे कमरे से बाहर जाने को कहती है। निहारिका उसे मारने के लिये दौड़ती है तो वह अलमारी से जा भिड़ती है और उसका नकली मंगलसूत्र गिर जाता है।
जब निहारिका बाहर जाती है तो रजनी उसे कहती है कि वह अच्छे से अपने कमरे में सेटल हो जाये। रजनी राध्या के पास आकर उसे पीले रंग की साड़ी और श्रृंगार देती है अगले दिन बसंत पँचमी के लिए। राध्या कहती है कि यह त्यौहार उसका पसंदीदा है और वह छोटे में सरस्वती वंदना गाती थी।
अगले दिन रजनी, राध्या और एकता कीचन में काम कर रही थी तब निहारीका आकर पूछती है कि आज तीनों ने पीले रंग के कपड़े क्यों पहने हैं? रजनी कहती है कि आज बसंत पंचमी है तो पीले रंग के कपड़े पहनते हैं।
निहारिका ने कहा उसके पास पीली ड्रेस नहीं है रजनी ने कहा कोई बात नहीं वह इस घर की सदस्य नहीं बल्कि मेहमान है। रजनी राध्या से प्रथम के लिए पीला कुर्ता निकालकर रखने को कहती है तो राध्या कहती है उसने बेड पर रख दिया है।
इसके बाद निहारिका प्रथम के कमरे में जाकर उसका कुर्ता छुपा देती है। प्रथम नीचे वाइट कुर्ते में आता है तो रजनी उससे पीले कुर्ते के बारे में पूछती है? प्रथम कहता है वहां कोई कुर्ता नहीं है। राध्या कहती है उसे कुर्ता निकालकर बेड पर रखा था।
उसी समय निहारिका भी सफेद कुर्ते में आती है और कहती है कि हम दोनों ने एक जैसे रंग पहने हैं एयर रजनी को सुनाती है। निहारिका प्रथम के साथ फोटोज लेती है कि राध्या के हाथ से हल्दी गिरकर प्रथम के कुर्ते पर आ जाती है।
रजनी कहती है कि सरस्वती माता भी यही चाहती है कि प्रथम अपने परिवार के रंग में रंगे। और कहती है कि निहारिका के ऊपर हल्की का एक कण भी नहीं गिरा।
वहीं, पण्डित जी आकर ओमकार से कहते हैं कि वह गायक जो सरस्वती वंदना गाने के लिए आने वाली थी उसकी अचानक से तबियत खराब हो गयी है तो वह नहीं आ पाएगी। रजनी को राध्या की बात याद आती है।
रजनी पण्डित जी से कहती है कि शकुंतला की यादआसत लाने में सबसे बड़ा योगदान राध्या का रहा है तो क्यों न वह सरस्वती वंदना गाये। पण्डित जी हां कह देते हैं और रजनी उर्मिला से वीणा लाने को कहती है। यह सुनकर निहारिका बहुत गुस्से में आ जाती है और कुछ नया प्लान करती है।
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