मन अतिसुन्दर के सोमवार के एपिसोड में राध्या सड़कों पर लोगों से साधुओं की टोली का पता पूछती है। उसे कोई पता मिलने के बावजूद भी वह हार नहीं मानती उल्टा वह जल्द से जल्द ढूंढने के लिए हर मंदिर में जाती है।
वहीं, घर पर दादी साधुओं के श्राप से परेशान होकर उर्मिला को मारने के लिए दौड़ती है और उसे ही दोषी ठहराती है। वह कहती है राध्या साधुओं को ढूढने के बहाने से मटरगस्ती कर रही होगी।
दादी कहती है साधुओं के श्राप का असर हो गया है हमारे घर पर इसीलिए मौसम बिग गया है। घरवाले कहते हैं कि सिर्फ उनके घर पर नहीं बल्कि पूरे शहर में मौसम बिगड़ा हो रखा है। दादी उनकी बातों को सुनने और मानने के लिए राजी नहीं हुई।
वहीं, रजनी प्रथम को कॉल करके कहती है कि राध्या घर से साधुओं को ढूढने के लिए निकली है पर मौसम बहुत बिगड़ा हुआ है और वह अब तक घर लौटकर नहीं आयी है। प्रथम कहता है कि उन्हें थोड़ी देर रुकना चाहिये शायद वही घर लौट आये।
यह कहकर प्रथम सोचता है कि राध्या को उस गलती का बहुत पछतावा हो रहा था तो अब इसके लिए भी वह बहुत परेशान होगी। प्रथम उसे ढूढने के लिए निकल पड़ा। उसने राध्या को कॉल किया तो रजनी ने उठाया और कहा वह अपना फोन घर पर ही भूल गयी है।
दूसरी ओर दादी उर्मिला के साथ लेटकर परिक्रमा कर रही थी। रजनी और ओमकार ने उन्हें उठने को कहा। दादी ने कहा श्राप से मुक्त होने के लिए यह करना पड़ेगा। ओमकार ने कहा वह अपने पण्डित जी से इसका हल पूछेंगे।
राध्या एक मंदिर में पहुंची और वहां से वह एक पेड़ के नीचे महादेव की फ़ोटो से प्रार्थना की कि वह उन तीन साधुओं को ढूढने में उसकी मदद करे। इसके बाद वह एक चाय की टपरी पर पहुंची जहां उसके ऊपर एक पैम्फलेट उड़कर आ गया।राध्या ने जब देखा तो वह ढंग रह गयी। उसने उन तीन साधुओं को देखा जो उसके घर सुबह आये थे।
वहीं, निहारिका खुश होकर शैम्पेन पीने लगी। रजनी को निहारिका का ब्रेसलेट मिला जिसे लौटने वह उसके कमरे में आ रही थी। वहीं, निहारिका उन एक्टर्स से बात करके उनकी खूब तारीफ की और साथ ही कहा कि वह श्राप वाली बात के लिए उन्हें डबल पैसे देगी।
रजनी ने पूछा किसको वह डबल पैसे दे रही है? निहारिका झूठ कह देती है। रजनी को कुछ आभास होता है कि कमरे में कुछ है। इसी बीच निहारिका दारू की बोतल छुपा देती है।
रजनी के जाने के बाद निहारिका प्रथम को कॉल करती है जो उसका फोन नहीं उठाता। इसी वजह से निहारिका को गुस्सा आता है और वह दारू की बोतल फेक देती है।
राध्या उस नाटक के पते पर पहुंचती है। उसे याद आता है कि उसने बोरी देने में कोई गलती नहीं की थी। उसने मूर्ति को हाथ भी नहीं लगाया था न ही पार्टी के पहले कुछ खाया पीया था तो क्या तीन चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं?
राध्या ने उन तीन साधुओं को देखा जिसमें से एक ने कहा कि उनके एकाउंट में सुबह के काम के पैसे आ गए हैं। राध्या ने सोचा सुबह तो वह उनके घर आये थे। उसने सोचा क्या किसी ने उन्हें पैसे दिए थे अभिनय करने के लिए? इसी समय राध्या को सच पता लगाने का आईडिया सूझता है।
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