मन अतिसुंदर के गुरुवार के एपिसोड में निहारिका कहती है कि वह मित्तल परिवार को अपना मानती है इसीलिए तो वह लंदन से आकर यहां मित्तल परिवार का बिज़नेस सेट किया वरना आज मित्तल परिवार सड़क पर होता।
निहारिका इमोशनल ड्रामा करने लगी कि आज मुझे यह फल मिल रहा है मेरी नियत और मेहनत का और वह भी इस नर्स के झूठे इल्जाम लगाने पर? उर्मिला कहती है कि उसे निहारिका पर पूरा भरोसा है। शकुंतला कहती है कि मुझे तो पहले दिन से ही निहारिका पर विश्वास है।
शकुंतला ज्योति से कहती है कि नर्स की बैग लेकर आये ताकि वह उसका लाइसेंस देख सके कि यह वाकई में नर्स है या फर्जी है। जब वह उसकी बैग को खाली करती है तो उसके कपड़ों के साथ बहुत सारे पैसे मिलते हैं। व्योम उसे उठाकर उससे पूछता है कि इतने पैसे एक नर्स के पास कैसे आये?
निहारिका अपने आपको बचाने के लिए पहले ही कह देती है कि यह भी कह देना कि मैंने ही यह पैसे तुम्हे दिए हैं? नर्स ने कहा निहारिका ने ही मुझे पैसे दिए हैं। निहारिका कहती है नर्स से थोड़ा अपना दिमाग लगाओ झूठ बोलने से पहले मैं क्या तुम्हें पैसे दूंगी ताकि तुम सभी के सामने मुझपर इल्जाम लगा सको रजनी को मारने का?
शकुंतला कहती है हमें राध्या से पहले इस नर्स का कुछ करना पड़ेगा। उर्मिला कहती है कि हमें इस नर्स को पोलिस के हवाले कर देना चाहिए। नर्स कहती है ऐसा मत करो मैं खुद इस घर से चली जाऊंगी और यह कहकर नर्स चली जाती है।
इसके बाद निहारिका कहती है प्रथम से कि आज मुझे इतना पराया महसूस हुआ जितना उस दिन भी नहीं हुआ था जब तुम्हारी शादी राध्या से हुई थी। उसने कहा तुमने मुझपर भरोसा नहीं किया? प्रथम उससे माफी मांगता है कट व्यह कहती है अब क्या मतलब तुमने भी मुझपर शक किया।
निहारिका अपने कमरे में जाकर पैकिंग करती है तो शकुंतला उसे जाने से रोकती है। निहारिका कहती है आज राध्या ने इतना बड़ा इल्जाम लगाया मुझपर आगे जाकर पता नहीं व्यह क्या करेगी। और मैं अपनी और बेइज्जती नहीं करा सकती।
वहीं, राध्या प्रथम से कहती है कि नर्स सही कह रही थी तो प्रथम उसे जोर से डांट देता है। वह कहता है निहारिका एक अच्छे खानदान से आती है। वह ज़िद्दी, मुँहफट और उसका गुस्सा मेरे जैसा है लेकिन वह मुजरिम नहीं है।
निहारिका बैग लेकर आती है और सबसे कहती है कि उसे कोई न रोके और वह घर से चली जाती है। शकुंतला कहती है जाना किसी और को चाहिए था और कोई और चला गया। ओमकार, रजनी, एकता, शकुंतला और प्रथम सभी राध्या को छोड़कर चले जाते हैं।
राध्या रजनी के कमरे में आकर उसे पैर पर अपना सिर रखती है और बहुत रोती है। वह कहती है आज अगर आप होते तो ऐसा नहीं होता। आप सही और गलत के बीच में फर्क पता कर लेते और जान लेते कि नर्स सही कह रही थी। तभी पीछे से प्रथम आता है और राध्या को रोते हुए रजनी को गले लगाते देखता है।
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