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रविवार, मार्च 8, 2026

पुरानी यादों में डूबीं ‘गुंजा’: हर होली पर याद आते हैं ‘नदिया के पार’ के वो सुनहरे दिन: साधना सिंह

रंगों का त्योहार होली आते ही हर तरफ मस्ती और उल्लास छा जाता है, लेकिन बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री साधना सिंह के लिए यह मौका पुरानी यादों की गलियों में लौटने जैसा होता है। 1982 की सुपरहिट फिल्म ‘नदिया के पार’ में ‘गुंजा’ का यादगार किरदार निभाने वाली साधना सिंह ने हाल ही में साझा किया कि हर होली उन्हें उनकी पहली फिल्म के उन शानदार दिनों की याद दिलाती है।

‘जोगी जी धीरे-धीरे’ आज भी है दिल के करीब
साधना सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि फिल्म का सदाबहार गाना ‘जोगी जी धीरे-धीरे’ उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा, “यह गाना केवल एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि इसमें उस दौर की मासूमियत और गांव की मिट्टी की महक बसी है। शूटिंग के दौरान जो हंसी-मजाक और छेड़छाड़ होती थी, वह सब इतना असली था कि आज भी उसे याद कर आंखें नम हो जाती हैं।”

बदलते समय के साथ नहीं फीके हुए रंग
सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ होली की शुभकामनाएं साझा करते हुए अभिनेत्री ने लिखा कि समय भले ही बदल गया हो, लेकिन कुछ यादों के रंग कभी फीके नहीं पड़ते। उन्होंने फिल्म के उन दिनों को याद किया जब जौनपुर और उत्तर प्रदेश के गांवों में फिल्म की शूटिंग हुई थी। उनके अनुसार, उस समय होली मनाने का तरीका बहुत सीधा और भावनाओं से भरा होता था।

आज की होली और तब की होली में अंतर
​अभिनेत्री ने बदलते दौर पर चर्चा करते हुए कहा कि अब त्योहारों में वह पहले जैसी सादगी नहीं रही। उनके अनुसार, पहले होली केवल हुड़दंग नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने का जरिया थी। वे कहती हैं, “शूटिंग के दौरान हमने जो होली खेली थी, उसमें दिखावा कम और भावनाएं ज्यादा थीं। आज के तकनीकी दौर में हम रील (Reels) तो बना लेते हैं, लेकिन वो रूहानियत कहीं खो गई है जो ‘नदिया के पार’ के सेट पर महसूस होती थी।”

“जब भी मैं यह गाना सुनती हूं, मुझे वो गांव की चौपाल, चंदन (सचिन पिलगांवकर) के साथ वो नोक-झोंक और पूरी टीम का वो पारिवारिक माहौल याद आ जाता है। वो दिन मेरे करियर के सबसे खूबसूरत दिन थे।” – साधना सिंह

एक ऐसी फिल्म जिसने इतिहास रच दिया
राजश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ‘नदिया के पार’ ने भारतीय सिनेमा में ग्रामीण संस्कृति को एक नई पहचान दी थी। आज भी लोग साधना सिंह को उनके असली नाम से ज्यादा ‘गुंजा’ के नाम से पहचानते हैं। फिल्म में होली का वह दृश्य आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित दृश्यों में गिना जाता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, साधना सिंह की ये यादें हमें उस सरल और प्रेमपूर्ण युग की याद दिलाती हैं, जहां त्योहारों का मतलब केवल रंग नहीं, बल्कि अपनों का साथ और सच्ची भावनाएं होती थीं।

फैंस के लिए ‘गुंजा’ का संदेश
​हर साल होली पर साधना सिंह को देशभर से हजारों संदेश मिलते हैं। लोग उन्हें आज भी उसी सादगी भरे अंदाज में देखना पसंद करते हैं। इस साल भी उन्होंने अपने प्रशंसकों से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और त्योहार को उसी पवित्रता के साथ मनाएं जैसे पहले मनाया जाता था। उनका मानना है कि ‘नदिया के पार’ की विरासत केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों का एक दस्तावेज है जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।

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