मन अतिसुंदर के शनिवार के एपिसोड में प्रथम अहम से कहता है कि आप दोनों को अलग होना है इसीलिए आपने राध्या और मुझपर इल्जाम लगा रहे हो। शकुंतला उससे शांत होने को कहती है और सभी की कहासुनी के बीच रजनी थाल लेकर आकर उसको बजाकर सभी को शांत करवाती है।
वह एकता से कहती है कि वह घर से अलग न हो और वह तो कितने सालों से घर की जिम्मेदारी पूरी करती आई है। एकता उनसे कहती है कि वह ऐसा न करे।
यह सब सुनकर प्रथम कहता है अहम से कि उसे ऐसा लगता है कि घरवाले राध्या और मुझे ज़्यादा प्रेम करते हैं तो हम दोनों इस घर से चले जायेंगे और आप एकता के साथ यही रहो।
यह सुनकर राध्या हैरान रह जाती है और प्रथम को उसका फैसला बदलने को कहती है लेकिन वह नहीं मानता। रजनी भी उसे समझाती है लेकिन उसका उसपर कोई असर नहीं पड़ता।
तभी शकुंतला हारकर कहती है कि जिसको भी बंटवारा करना है और अलग होना है वह इसी घर में रहकर अलग हो। ओमकार होली के रंग यानी गुलाल से एक रेखा खींच देता है और प्रथम से कहता है कि घर का एक चौथाई हिस्सा होगा जहां एक तरफ पूरा परिवार होगा और दूसरी तरफ वह और राध्या।
प्रथम और अहम दोनों अपने अपने हिस्सा में चले जाते हैं। शकुंतला रजनी को कोसती है क्योंकि उसने अपनी बहुओं को इतनी छूट दी। रजनी राध्या से कहती है कि उसे जब एकता का सच पता चल गया था तो उसे बता देना चाहिए था। रजनी उससे कहती है कि आज सबसे ज़्यादा ठेस उसने ही उसे पहुंचाई है।
दूसरी ओर एकता किचन में जाकर कहती है कि अच्छा खासा मैं और अहम जी घर से जा रहे थे कि प्रथम ने कह दिया कि वह चले जाएंगे इससे क्या हुआ उल्टा घर की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर और बढ़ गयी।
एकता लाकर राध्या को उसके बर्तन दे देती है कि उर्मिला सवाल उठाती है कि राध्या को तो खाना बनाना आता ही नहीं। यह सोचकर रजनी घबरा जाती है कि अब प्रथम क्या खायेगा और वह वापस से राध्या को कोसने लगती है।
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