मन अतिसुंदर के गुरुवार के एपिसोड में राध्या प्रथम से कहती है कि वह अकेले बाहर ठंड को सहन कर लेगी क्योंकि थोड़ी देर में अभी सूर्योदय हो जाएगा। प्रथम उससे कहता है कि अभी सिर्फ 1 साढ़े बारह ही बजे हैं।
प्रथम जाकर अंगीठी लेकर आता है और उसको जलाने वाला होता है कि राध्या छुप जाती हैं। प्रथम राध्या से कहता है कि वह उसपर भरोसा करे और बाहर आ जाये।
डरते हुए राध्या आती है तो प्रथम उसे ठंड से बचाने के लिए उसे अपना जैकेट पहनाता है। दोनों उसी जैकेट में एक दूसरे को देख रहे होते हैं और नीहारिका उन दोनों को साथ में देखकर आग बबूला होती है।
तभी शकुंतला सोचती है कि रजनी सही कह रही थी कही अगके चलकर राध्या हमें जवाब न देने लग जाये। राध्या और प्रथम को दूर करने के लिए निहारिका वहां आती है और प्रथम से उसके साथ रहने को कहती है।
इसी बीच शकुंतला आकर देखती है कि राध्या अंगीठी और हीटर के साथ बाहर सजा काट रही है। वह उसपर बहुत गुस्सा होती है और घर के अंदर आकर बर्तन पटक देती है जिससे सभी लोग नीचे आ जाते हैं।
शकुंतला सभी को बताती है कि राध्या हीटर और अंगीठी के साथ सजा काट रही थी। शकुंतला ने कहा सबसे अफसोस की बात यह है कि इसमें हमारा पोता प्रथम इसका साथ दे रहा था। उसने कहा प्रथम ने उसका आज अपमान कर दिया।
प्रथम ने कहा व्यह राध्या का पति है और उसकी तबियत का ध्यान दे रहा था। उसने कहा कि आपका मान बचा रहे इसीलिए मैंने राध्या की मदद की आपकी सजा को पूरा करने के लिए।
यह सुनकर शकुंतला जानबूझकर सभी के सामने खुद को चोट पहुंचाने जा रही थी कि उसने प्रथम ने कहा कि वह उसके सिर पर कसम खाकर बोले कि वह चाहे अब से राध्या को जो सजा दे व्यह बीच में नहीं बोलेगा।
तभी शकुंतला कहती है सबसे कि राध्या की सजा पूरी नहीं हुई है और वह उसे बाहर वापस खड़े रहने के लिए भेजती हैं। वहीं, प्रथम को वहां वही हीटर का तार मिलता है जो कट गया था।
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