मैन अतिसुन्दर के शनिवार के एपिसोड में प्रथम राध्या से कहता है कि वह बेड पर सो जाएं और वह सोफे पर सो जाएगा। राध्या कहती है कि वह ऐसे भी बेड पर फिट नहीं आ रही है और वह जाकर सो जाती है।
वहीं, अगले दिन रजनी राध्या और प्रथम से कहती है कि आज पोष अमावस्या है और आज के दिन घर के नवविवाहित जोड़ी भगवान और हमारे पूर्वजों की पूजा करते हैं। दादी आकर कहती है कि राध्या यह पूजा नहीं कर सकती क्योंकि यह घर में सब गड़बड़ करती है।
दूसरी ओर रजनी उससे कहती है कि राध्या जो गलती करती है उसे खुद ही सुधार देती है। उसकी वजह से अगर साधुओं ने श्राप दिया तो उसने ही पता किया वह साधु नकली थे। जब राध्या की वजह से बिज़नेस में नुकसान हुआ तो उसी ने ही वही डील हमें दिलाकर दी।
ओमकार उस समय आता है और कहता है कि रजनी एकदम सही कह रही है। दादी आकर निहारिका से कहती है कि तुम यहाँ चालें चलो और हमारे पूर्वजों का आशीर्वाद राध्या को मिल जाएगा।
निहारिका अखबार में एक खबर पड़ती है और उस समय मामी को देखती है जो मोगरे के फूल लेकर जाती है। निहारिका उन्हें बुलाकर फूलों के बारे में पूछती है तो वह कहती है कि प्रथम के दादा और परदादा को मोगरा के फूल बहुत पसंद थे।
निहारिका मामी से झूठ कहती है कि उसके चहरे पर रैशेज पड़ गए हैं और वह मोगरे को छोड़कर चली जाती है। निहारिका वह फूल तुलसी माँ की मिट्टी में छुपा देती है।
वहीं, एकता और मामी आपस में टकरा जाते हैं और मामी राध्या से कहती है कि उसे मोगरे के फूल नहीं मिल रहे। निहारिका कहती है कि राध्या ले आएगी। राध्या कहती है हम पहली बार प्रथम के साथ पूजा कर रहे हैं तो किसी चीज़ की कमी नहीं होनी चाहिए। वह यह कहकर निकल जाती है कि वह सीधे मंदिर में मिलेगी। सभी लोग तैयार होकर मंदिर में पहुंचते हैं। प्रथम रजनी से राध्या के बारे में पूछता है। वह उसे कॉल करता है।
उसी समय राध्या ऑटो से पहुँचती है और उसका ऑटो खराब हो जाता है। राध्या जब ऑटो से उतरती है तो उसे वहां कंस्ट्रक्शन दिखता है। उसका पैर वहां मिट्टी में धस जाता है। उसी समय दिखाते हैं कि निहारिका ने ऑटो वाले को पैसे दिए थे उसे आधे रास्ते पर छोड़ने के लिए। और उसी ने ही साइट पर वर्कर्स को कहा था कि आज शिव मंदिर में भंडारा है तो वह सब वहीं चले जाते हैं।
राध्या थोड़ा आगे बढ़ती है तो उसका पैर सीमेंट में धस जाता हूं और जलने लगता है। निहारिका जो छुपकर सब देखती है उसकी तरफ एक पेड़ का बड़ा सा हिस्सा फेकती है जिसकी वजह से उसका फोन और पर्स गिर जाते हैं।
उसी समय निहारिका एक बड़ा सा पत्थर को हिलाने की कोशिश करती है ताकि राध्या का अंत हो जाये। दूसरी ओर प्रथम पूजा में बैठने से पहले कलश गिरा देता है और बहार राध्या को ढूढने जाता है। तब एक चोर आकर उसका बटुआ चुरा लेता है।
प्रथम उसके पीछे भागता है। राध्या उस बड़े से पत्थर को अपनी ओर आते देखती है तो भगवान से प्रार्थना करती है कि शायद उसका और प्रथम का साथ यही तक था। कुछ दूरी पर चोर उसका बटुआ फेक देता है जब वह बटुआ उठाता है तो सामने राध्या खड़ी रहती है।
प्रथम राध्या को देखकर उसको पुकारता है और उसको बचाने के लियस उसके पीछे भागता है। उसी समय दादी राध्या के सामने आकर खड़ी हो जाती है।
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